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स्पंदनिका : जीवन के अनछुए तारों की झंकार
स्पंदनिका : जीवन के अनछुए तारों की झंकार
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Author : Dr. Sanjay Peshivadiya
साहित्य केवल समाज का दर्पण नहीं है, बल्कि यह जीवन की उलझनों को सुलझाने और अंतर्मन को दिशा देने वाला एक प्रकाश-स्तंभ भी है। आदरणीय डॉ. संजय पेशीवाडिया जी का यह नवीनतम कहानी संग्रह 'स्पंदनिका' इसी प्रकाश को पाठकों के हृदय तक पहुँचाने का एक अत्यंत सार्थक और सुंदर प्रयास है। 'स्पंदनिका' का अर्थ ही है—वह सूक्ष्म कंपन या धड़कन, जो जीवन के हर भाव के साथ हमारे भीतर उठती है।
इस संग्रह की सबसे बड़ी विशेषता इसकी विषय-विविधता और गहराई है। डॉ. पेशीवाडिया जी ने अपनी लेखनी के माध्यम से मानव जीवन के उन सभी महत्वपूर्ण पहलुओं को छुआ है, जिनसे हम प्रतिदिन गुजरते हैं।
कहानियों के मुख्य स्वर और उनकी प्रासंगिकता:
सामाजिक और जीवन उपयोगी: इस संग्रह की कहानियाँ शून्य में नहीं विचरतीं, बल्कि वे हमारी सामाजिक संरचना की ठोस जमीन पर खड़ी हैं। हर कहानी अपने आप में जीवन उपयोगी है, जो हमें यथार्थ का सामना करना सिखाती है और व्यावहारिक जीवन की उलझनों के समाधान प्रस्तुत करती है।
सकारात्मकता और अनुशासन: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में मनुष्य अक्सर खुद को अकेला और कमजोर महसूस करता है। ऐसे में यह पुस्तक एक सच्चे मार्गदर्शक की तरह सामने आती है। कहानियों के पात्रों के माध्यम से लेखक ने यह बहुत ही सरलता और प्रभाव के साथ स्थापित किया है कि आत्मविश्वास, समय पालन (अनुशासन) और मन की शक्ति कैसे एक साधारण इंसान को असाधारण उपलब्धियों तक ले जा सकते हैं।
भावनात्मक गहराई: जहाँ एक ओर यह संग्रह जीवन के व्यावहारिक और मनोवैज्ञानिक पहलुओं पर बात करता है, वहीं दूसरी ओर यह मानवीय संवेदनाओं के सबसे कोमल और शाश्वत धागों—'प्रेम' और 'विरह'—को भी पूरी शिद्दत से महसूस कराता है। प्रेम की पूर्णता का उल्लास हो या विरह की मौन कसक, लेखक ने इन भावों को शब्दों के माध्यम से जिस जीवंतता के साथ उकेरा है, वह पाठकों की आँखों को नम और हृदय को तृप्त कर देता है।
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