Evincepub Publishing
Bharose ki Lakeer
Bharose ki Lakeer
Couldn't load pickup availability
Author : Vineet Agrawal
नक़्शे पर यह सिर्फ़ एक पतली-सी लकीर है — काग़ज़ पर खिंची एक सीधी रेखा। पर ज़मीन पर वही लकीर सैकड़ों खेतों, हज़ारों परिवारों और अनगिनत भावनाओं से होकर गुज़रती है।
बलासगंज के एक साधारण शिक्षक परिवार में जन्मे अर्जुन राठौर के लिए इंजीनियर बनने का सपना ही सबसे बड़ी चुनौती था — माँ की आख़िरी सोने की चेन बेचकर भेजी गई पढ़ाई, बरसों की मेहनत, और आख़िरकार एक बड़ी सार्वजनिक ऊर्जा कंपनी में नौकरी। पर जल्द ही अर्जुन को एहसास होता है कि राजस्थान के संगारपुर गाँव में पाइपलाइन बिछाना सिर्फ़ इंजीनियरिंग नहीं है — यह भरोसा बिछाना है, ज़िद्दी किसानों के मन में, उलझे हुए राजस्व रिकॉर्डों में, और ज़िला प्रशासन की जटिल फ़ाइलों में।
इसी संघर्ष के बीच उसकी मुलाक़ात होती है निडर, अनुशासित एसडीएम मीरा तवारी से — जिनका रिश्ता टकराव से शुरू होकर, धीरे-धीरे भरोसे, साझेदारी और आख़िर में एक गहरे प्रेम में बदल जाता है।
चार भागों और छत्तीस अध्यायों में फैली यह कहानी सिर्फ़ एक जीत की सीधी दास्तान नहीं — इसमें ज़मीन के काग़ज़ों की उलझनें हैं, गाँव वालों का गुस्सा और भरोसा दोनों हैं, प्रशासनिक जटिलताएँ हैं, एक गुरु की सीख है, और उन सबके बीच पनपता वह रिश्ता है जो हर मोड़ पर परखा गया।
भरोसे की लकीर विविधता में एकता, सेवा में समर्पण और सफलता में सहभागिता की उस भावना की कहानी है, जो किसी एक संगठन तक सीमित नहीं — यह हर उस व्यक्ति की कहानी है जो ज़मीन और इंसानों दोनों से ईमानदारी से जुड़ना चाहता है।
(यह एक काल्पनिक कृति है। इसमें वर्णित सभी पात्र, संस्थाएँ और घटनाएँ लेखक की कल्पना की उपज हैं।)
Share
